प्रधानमंत्री से बातचीत से पहले दिल्ली से एक टीम आई थी जिसने बताया था कि किस सवाल का कैसा जवाब देना है.

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बीते 20 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के किसानों को संबोधित किया था. तब छत्तीसगढ़ की एक महिला किसान ने दावा किया था कि उनकी आय दोगुनी हो गई है. वहीं उनके ग्राम प्रधान ने एक समाचार चैनल से बातचीत में दावा किया कि प्रधानमंत्री से बातचीत से पहले दिल्ली से एक टीम आई थी जिसने बताया था कि किस सवाल का कैसा जवाब देना है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ के किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात की थी. इस दौरान छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कन्हारपुरी गांव की एक महिला चंद्रमणि कौशिक से जब प्रधानमंत्री मोदी ने खेती से होने वाली आय संबंधी सवाल किए तो उन्होंने कहा था कि पहले के मुकाबले अब उन्हें ज्यादा मुनाफा हो रहा है और उनकी आय दोगुनी हो गई है.
इस बात को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के कई अन्य नेताओं ने किसानों की स्थिति सुधारने की बात कहकर खूब वाहवाही बटोरी थी.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करते हुए चंद्रमणि ने कहा था, ‘कुछ लोग 50-60 रुपये में 25 किलो सीताफल हमसे ठग कर ले जाते थे. फिर हम लोग कृषि आत्मा परियोजना से जुड़ गए. अब जो 50 रुपये मिलता था, उसमें सीधे 700 रुपये मुनाफा कमाते हैं.’
लेकिन हाल ही में एबीपी न्यूज़ ने अपनी एक रिपोर्ट में इस दावे को गलत बताया है. इस समाचार चैनल के एक संवाददाता कन्हारपुरी गांव जाकर जब वापस चंद्रमणि कौशिक से बातचीत करते हैं तो वे कहती हैं कि वे दो एकड़ में धान की खेती करती हैं, उसे लेकर उनकी आय दोगुनी नहीं हुई है.
कन्हारपुरी गांव के सरपंच परशुराम भोयर ने बताया कि प्रधानमंत्री के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पहले दिल्ली से एक टीम आई थी और उन्होंने बताया था कि पीएम के किस सवाल का कैसा जवाब देना है. इसलिए चंद्रमणि कौशिक ने कहा था कि उनकी आय दोगुनी हो गई है लेकिन हकीकत में ऐसा देखने को नहीं मिलता है.
एबीपी न्यूज़ की इस रिपोर्ट के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सफाई दी और कहा कि चंद्रमणि ने सीताफल के पल्प से हो रही दोगुनी आमदनी के बारे में बताया था, न कि धान की खेती के बारे में. इसके बाद जब दोबारा सरकार के इस दावे की तफ्तीश की गई तो ये भी दावा झूठा निकला.
इस बार चंद्रमणि कौशिक ने बताया कि पहले उन्हें सीताफल के जरिए 50-60 रुपये मिलते थे और अब 700 का मुनाफा होता है. लेकिन ये मुनाफा उनके अकेले का नहीं है, बल्कि उनके समूह में 12 महिलाएं काम करती हैं और ये मुनाफा सभी 12 लोगों में बंटता है.
एबीपी न्यूज़ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि यानी कि एक महिला को एक दिन में 58.33 रुपये का मुनाफा होता है. इस हिसाब से एक महिला को एक महीने में 1750 रुपये मिलते हैं. ये आय एक मनरेगा मजदूर की आय से भी कम है.
चंद्रमणि की समूह में काम करने वाली अन्य महिलाओं ने बताया कि सीताफल के पल्प के बिजनेस में उन्होंने 75,00 रुपये लगाया था लेकिन अभी तक लागत के भी पूरे पैसे भी वापस नहीं आए. महिलाओं ने दावा किया कि उन्हें मुनाफा नहीं हो रहा है.
आय दोगुना होने के संबंध में एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए एक अन्य महिला किसान से पुष्पा मानिकपुरी ने बताया, ‘ऐसा समूह को आगे बढ़ाने के लिए कहा जा रहा है. आय नहीं बढ़ी है. एक साल काम के बाद भी कुछ नहीं मिला है. हमने जो पूंजी लगाई है, वो भी नहीं मिली है.’
एबीपी न्यूज़ के अनुसार, जब इस बारे में चंद्रमणि से सवाल किया कि उनकी समूह की कुछ महिलाओं का कहना है कि उन्हें कुछ नहीं मिला तो वह चुप्पी साध गईं.

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